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Hospital की खस्ता हालत पर सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली समेत बंगाल और तमिलनाडु सरकार को नोटिस

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Hospital की खराब हालत देख आज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं बंगाल सरकार को आड़े हाथों लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मशहूर अस्पताल LNJP और ऐसे ही कई अन्य Hospital को नोटिस भेजा हैं जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने मरीजों की खराब अवस्था पाई।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को खराब अवस्था का दोषी पाया और उन्हें लताड़ते हुए सरकारों से जवाब मांगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से हॉस्पिटल में मरीजों की स्थिति एवं काम कर रहे सभी स्टाफों का ब्यौरा मांगा है। हाल ही में दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री पर कार्यरत सत्येंद्र जैन ने कहा था कि “दिल्ली में कोरोना वायरस का तीसरा स्टेज आ चुका है।” हालांकि इस बात की पुष्टि अभी केंद्र सरकार नहीं करती है। लेकिन मनीष सिसोदिया और मुख्यमंत्री केजरीवाल जी ने केंद्र से यह मांग रखी है कि दिल्ली को फिलहाल 80,000 बेड की आवश्यकता है। जिससे राजधानी में कोरोना के बढ़ते स्तर को समझा जा सकता है।

 

Hospital में इंसानों की हालत जानवरों से भी बदतर:- सुप्रीम कोर्ट

 

सुप्रीम कोर्ट ने Hospital की खराब हालात का सीधा जिम्मेवार राज्य सरकारों को करार दिया है। हॉस्पिटल में मर चुके पीड़ित व्यक्ति के शरीर को सही जगह न रखने का आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्य सचिव एवं Hospital के डायरेक्टर से डिटेल मांगी है ताकि नोटिस भेजा जा सके।

 

कोरोना टेस्टिंग क्यों कम हुई:- सुप्रीम कोर्ट

 

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की प्रताड़ना करते हुए यह सवाल पूछा है कि आखिर दिल्ली में टेस्टिंग की क्षमता क्यों कम कर दी गई। जबकि देश के बड़े बड़े शहर मुंबई और चेन्नई में तकरीबन 15000 से 17000 टेस्टिंग की जा रही है लेकिन दिल्ली में केवल 5000 टेस्टिंग ही क्यों कि जा रही है।

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